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Professional advisors for your Stock business.

Business is one the world’s best business counselling firm. We assist global pioneers with their association’s most basic issues and opportunities.

Recent Case Study

We work alongside national and international firms Share Market

We plainly comprehend that you need not to lose, but rather to gain more cash over your time of work with us. That is the reason we dismiss all high-chance undertakings, that may prompt a quick heap of money out of the blue however to a primary capital’s misfortune the second

Save time for things that really matter.

Collaboratively administrate empowered markets via plug-and-play networks.

Diverse Approach

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Professional Team

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Expert Advice

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Result Based

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OUR MIND SET

ट्रेडिंग करते वक्त जो गलतियाँ होती है- जैसे गलत Entery, गलत जगह Exit, ओवर ट्रेड में 1 ट्रेड में ज्यादा बड़ा लोस ले लेना,  लालच आना,  डर जाना, FOMO में  ट्रेड लेना |
ये सब कोन कराता है, हमारा माइंड और हमारा माइंड ये सब क्यूँ करता है, क्योंकि की इसको ट्रेनिंग दी गयी है, और ट्रेंनिंग किससे मिली, लर्निंग बुक, ऑडियो विडियो, और फिर टेस्ट की गयी स्ट्रेटजी, फाइनल टेस्ट के बाद हम ट्रेडिंग में आते है|
 उसके बाद भी गलतियाँ हो रही है तो माइंड को स्ट्रोंग बनाओ, दोबारा परफेक्ट ट्रेंनिग दो, की ओवर ट्रेडिंग न करे और जो भी रूल आपने बनाये है उसे फॉलो करे, तब जा कर कही थोडा बहोत मार्केट को समझ के आप भी प्रॉफिट कर सकते है|
 अन्यथा आप भी 95% लोग में गिने जाओगे एक लूजर की तरह, ये एक कड़वा सच है, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पाड़ता है, आप क्या खो सकते हो, सोचे और लग जाए मेहनत करने में सफलता जरूर मिलेगी, पर पहले बेस बनाने में जो मेहनत लगेगी उसके बारे में सोचो, की अपने माइंड को कैसे ट्रेन करे परफेक्ट तरीके से  ताकि सटीक निशाना लगाये ये दिमाग |
प्रेक्टिस और लर्निंग से सब कुछ हासिल किया जा सकता है, धैर्य से सब होगा, हर किसी को शोर्ट टर्म में पैसा बनाना है, कम पूजी में जरिटर्न चाहिए, जो की पॉसिबल ही नही है, 1 महीने के 15% के प्रॉफिट से लोग खुश नही है, हर किसी को 1 महीने में पैसा डबल करना है, और करे भी क्यों न, आप्शन ट्रेडिंग में 1 दिन में पैसा डबल हो जाता है, तो 1 महिना में 15 बार वो डबल कर सकते है पैसा, पर 15 बार आपको पैसा भी लाना पड़ सकता है घर से, क्योंकि  जितना बड़ा रिस्क उतना बड़ा प्रॉफिट और जितना बड़ा प्रॉफिट उतना बड़ा लोस 

Loss Reason 1 Min Time Frame

⚠️ सबसे बड़ा कारण – “1 मिनट टाइमफ्रेम और Fast Trading”

❌ 1 मिनट पर ट्रेडिंग = जुआ बन जाती है

  • बहुत ज़्यादा noise होता है
  • false signals बार-बार मिलते हैं
  • SL बार-बार hit होता है

छोटे move में emotions हावी हो जाते हैं
📌 Result: 90% लोग इस टाइमफ्रेम पर consistent loss करते हैं (आप अकेले नहीं हैं)

🔁 Step 1: टाइमफ्रेम बदलो

➡️ 1 मिनट को छोड़ो
➡️ 15 मिनट पर ट्रेड करो (intraday के लिए सबसे stable)
➡️ सिर्फ 2-3 high quality trades लो पूरे दिन में

🛠️ Step 2: Simple Strategy Follow करो

✅ Setup:

  • Chart: Nifty 50 Index (not premium)
  • Timeframe: 15 Min
  • Indicators: सिर्फ दो
  • 200 EMA (Trend)
  • RSI (Strength Confirmation)

📈 Strategy:

  • Trend देखो: 200 EMA के ऊपर है? तो Buy ही सोचो
  • Support पर bullish candle? तो Entry लो
  • SL: उसी candle का low
  • Target: Risk का कम से कम 2 गुना

    💣 Step 3: Overtrading बंद करो

    • सिर्फ 2 ट्रेंडिंग टाइम्स पर ट्रेड करो:

      • 9:30 से 10:30 (Opening range breakout)

      • 1:30 से 2:30 (Afternoon reversal)

    📌 पूरा दिन स्क्रीन पर मत बैठे रहो
    📌 “हर मूव पकड़ना” = हर बार हारना


    📒 Step 4: हर ट्रेड का रिकॉर्ड रखो

    मैं आपको एक Daily Trading Journal Format (Excel या Google Sheet) दे सकता हूँ जिसमें आप:

    • Entry का screenshot लगाओ

    • Reason लिखो क्यों लिया

    • SL और Target track करो

    👉 इससे आप हफ्ते में 1 बार खुद analyse कर सकोगे:
    “गलती कहाँ हुई?”


    🧠 Bonus Psychology Tips:

    • SL hit होना कोई हार नहीं — बिना SL ट्रेड करना हार है

    • Real market में fast ट्रेड करना Fast loss को invite करता है

    • पैसा slow बनता है — daily 1% सही तो महीने में 20%+ possible है

✅  Weekly vs Monthly Option कौन सा बेहतर है?

CriteriaWeekly OptionMonthly Option
📆 Expiry Time1 Week1 Month
💸 Premiumकमज्यादा
⏳ Time DecayFast (Last 2 days में तेज़)Slow
🎯 Movement Impactजल्दी profit/lossधीरे move करता है
💥 RiskHigh

Low to Medium

🔍 Best ForScalping / IntradaySwing / Positional

✅ Comparison Table: Weekly vs Monthly vs Mid-Week

FeatureWeekly (This Thursday)Mid Expiry (Next Week)Monthly
Time ValueLow (fast decay)ModerateHigh (slow decay)
CostLow to MediumMediumHigh
MovementFastModerate + ManageableSlow & Stable
RiskHighBalanced ✅Low
Ideal ForFast scalpersControlled intraday ✅

Swing traders

🧠 Disciplined Trader Affirmations

(रोज़ सुबह और हर ट्रेड से पहले ज़रूर पढ़ें — ज़ोर से पढ़ें, ताकि दिमाग सुन सके)


🔸 FOMO से बचने के लिए:

  1. मुझे हर ट्रेड नहीं चाहिए, सिर्फ सही ट्रेड चाहिए।

  2. मैं बाजार का पीछा नहीं करता, मैं इंतज़ार करता हूं।

  3. मुझे पता है, आज नहीं तो कल — मेरे सिस्टम को मौका मिलेगा।


🔸 लालच कंट्रोल करने के लिए:

  1. मुझे सारा पैसा नहीं चाहिए — मुझे स्मार्ट पैसा चाहिए।

  2. थोड़ा प्रॉफिट लेना, सब कुछ खोने से बेहतर है।

  3. मैं हर बार jackpot नहीं मारूंगा — मैं consistency चाहता हूं।


🔸 जल्दी एग्जिट के पछतावे से बचने के लिए:

  1. हर ट्रेड की ज़िम्मेदारी मेरी है — चाहे वह जल्दी निकले या देर से।

  2. मैं Partial Booking के बाद शांत रहता हूं — अगला मौका फिर मिलेगा।


🔸 लॉस को एक्सेप्ट करने के लिए:

  1. हर SL मेरा टीचर है — मुझे बेहतर बना रहा है।

  2. SL कोई गलती नहीं, मेरा फाइनेंशियल हेलमेट है।

  3. मैं Loss को सम्मान देता हूं — वो मुझे सिखाता है।


🔸 गलत एंट्री, ओवरबॉट एंट्री से बचने के लिए:

  1. मैं सिर्फ Confirmed Signal पर ही एंट्री लूंगा।

  2. अगर प्राइस भाग रहा है — मैं नहीं भागूंगा। मैं शांत रहूंगा।


🔸 Overconfidence या Revenge Trading से बचने के लिए:

  1. हर ट्रेड नया है — मैं पुराने की भावना नहीं लाऊंगा।

  2. एक अच्छा ट्रेडर वही है, जो नो ट्रेड के दिन भी शांत रहे।


🔸 Discipline और Patience बढ़ाने के लिए:

  1. Discipline मुझे अमीर नहीं बनाएगा — लेकिन अनडिसिप्लिन मुझे गरीब ज़रूर बनाएगा।

  2. मैं Entry, SL और Target पहले तय करता हूं — बाद में नहीं बदलता।

  3. Emotion का काम है ReAct करना — मेरा काम है Ignore करना।

  4. मुझे स्क्रीन पर बैठने के लिए नहीं, प्रोसेस फॉलो करने के लिए ट्रेडिंग करनी है।


🔄 रोज़ का नियम (Daily Routine):

टाइमकाम
🌅 सुबह ट्रेड से पहलेAffirmations ज़ोर से पढ़ें (3 बार)
🕒 हर ट्रेड से पहले3 सवाल पूछें (Entry क्यों, Risk कितना, SL-Target कहाँ)
📓 हर ट्रेड के बादJournal में लिखें — एंट्री सही थी या इमोशनल थी
🌆 दिन खत्म होने पर2 मिनट रिव्यू करें — “मैंने आज क्या अच्छा किया?”

🔥 आपके अभी तक के मुख्य सवाल (मैंने नोट कर लिए हैं):

  1. FOMO: जल्दी में ट्रेड ले लेना, सोच लेना कि “अब नीचे नहीं जाएगा” और वो नीचे चला जाना।

  2. लॉस एक्सेप्ट न करना: ये मान लेना कि “इतना गिर चुका है, अब तो उठेगा” — और SL न लगाना या काटना।

  3. लालच: सोचते हैं “अब ज़्यादा लूंगा”, और ट्रेड रुकते ही उल्टा हो जाता है।

  4. जल्दी Exit का पछतावा: जब जल्दी Exit करते हैं तो ट्रेड 2x–5x भागता है, और जब Hold करते हैं तो ट्रेड Loss दे देता है।

  5. Overbought Entry: हो सकता है आप ट्रेड तब ले रहे हों जब स्टॉक पहले से Overbought है।

“मैं जल्दी में ट्रेड ले लेता हूं, लगता है इसके नीचे नहीं जाएगा — और वो उससे भी नीचे चला जाता है।”

ये ट्रेडिंग की सबसे कॉमन और खतरनाक मानसिकता में से एक है, जिसका नाम है:

🔥 “Predictive Bias” + Fear of Missing Out (FOMO)”

यानि आप खुद ही ये मान लेते हो कि “अब नीचे नहीं जाएगा”, जबकि मार्केट को कंट्रोल आप नहीं करते — और बिना किसी पुष्टि के ट्रेड ले लेते हो।


🧠 मन को कैसे काबू करें? — स्टेप बाय स्टेप समाधान:

✅ 1. तय कर लो: मैं ‘रिएक्ट’ करूंगा, ‘प्रिडिक्ट’ नहीं।

  • आपको भविष्य नहीं देखना है, सिर्फ संकेतों पर रिएक्ट करना है।

  • एक लाइन याद रखो और स्क्रीन के पास चिपका दो:

    “Confirm होने दो, फिर चलूंगा — अंदाज़े पर नहीं।”


✅ 2. ट्रेड लेने से पहले ये 3 सवाल ज़रूर पूछो (एक कागज़ पर लिख लो)

हर बार जब आप किसी ट्रेड का सोचें, तो ज़ोर से पूछिए:

  1. क्या चार्ट ने मुझे सिग्नल दिया या मैं सोच रहा हूं बस?

  2. क्या SL और Target दोनों पहले से तय हैं?

  3. क्या अगर ये लॉस हो गया, तो मैं शांत रहूंगा?

अगर 3 में से कोई एक सवाल का जवाब “ना” है, तो ट्रेड कैंसल कर दो। ये नियम लोहे की तरह फॉलो करना है।


✅ 3. “इसके नीचे नहीं जाएगा” को कैसे बदलें?

आपका दिमाग कहता है:

“अब नहीं गिरेगा, अभी ले लो…”

आपको उसे बदलना है:

“अगर गिरा, तो मैं तैयार हूं SL के साथ”
“मुझे सही एंट्री चाहिए, सस्ती नहीं।”


✅ 4. SL को पहले ही चार्ट पर मार्क करो — एंट्री के पहले

आपके दिमाग को दृष्टि चाहिए, भरोसा नहीं
मतलब — SL, Target और Entry एक लाइन खींचकर देखो।

जब आप विज़ुअल देखोगे कि SL 5% नीचे है — और शेयर अभी भी गिर रहा है — आपका दिमाग खुद रुक जाएगा।


📌 आपके लिए 3 नियम आज से अपनाइए (स्क्रीन के पास रखिए)

  1. “Entry बिना Plan के = Exit बिना Profit के”

  2. “Market मेरा दोस्त नहीं है, नियम ही सहारा है”

  3. “सस्ता खरीदना ज़रूरी नहीं — सही Entry लेना ज़रूरी है”

आपने premium selection — यानी ATM, ITM, OTM के बीच क्या लेना सही है — ये पूछा है। इसका सीधा संबंध है आपके:

  • 🎯 Profit Potential
  • 🔴 Risk Level
  • ⏳ Time Decay (Theta)
  • 💥 Movement से फायदा कितना होगा

चलिए सबकुछ Hindi में बहुत सरल भाषा में समझते हैं:

🔍 सबसे पहले समझें:

टर्ममतलब
ATM (At The Money)Strike Price = Spot Price के बहुत पास
ITM (In The Money)Strike Price < Spot Price (for PE)
OTM (Out of The Money)Strike Price > Spot Price (for PE)

🔥 किसमें क्या फायदा और खतरा होता है?

Typeफायदा (Pros)नुकसान (Risk)किसके लिए सही?
ITM✔ Premium जल्दी बढ़ता है (delta high)
✔ ज्यादा stable होता है
❌ Premium महंगा होता है
❌ ज़्यादा capital लगता है
Safe ट्रेडर / Trend पकड़ने वाले
ATM✔ Balanced premium
✔ Movement मिलने पर अच्छा return
❌ Time decay लगता है
❌ Direction सही नहीं हुआ तो घाटा
Beginners + Scalpers
OTM✔ सस्ता premium
✔ कम capital में ट्राय कर सकते हैं
❌ तेजी से decay होता है
❌ कई बार zero हो जाता है
High risk traders only

💣 Risk किसमें ज़्यादा है?

Risk LevelType
🔴 सबसे ज़्यादा RiskOTM Options
🟠 Moderate RiskATM Options
🟢 सबसे कम RiskITM Options

Example:
मान लो Nifty Spot = 24,850

TypeOptionPremium (approx)अगर Nifty गिरता है तो…
ITM24,900 PE₹120जल्दी तेजी से बढ़ेगा
ATM24,850 PE₹85थोड़ा तेजी से बढ़ेगा
OTM24,800 PE₹50धीरे बढ़ेगा या decay हो सकता है

✅ किसे लेना चाहिए?

आप कौन हैं?Trade किसमें करें?
New traderATM या ITM (safe)
Risk Takerकभी-कभी OTM पर small qty
ScalperATM (quick in-out trades)
Trend traderITM (अगर trend साफ़ दिखे)

🔍 पहले समझें: ITM Options की Price Behavior

| Premium बड़ा क्यों होता है?
👉 क्योंकि उसमें already intrinsic value + time value होता है।
👉 लेकिन अच्छी बात ये है कि ITM options में delta ज़्यादा होता है
➡ यानी Nifty 10 point move करे तो ITM option 6-8 point move कर सकता है।


🎯 अब आपके सवाल का Direct Answer:

ITM कितना अंदर का लें? (Safe Range)

Nifty SpotIdeal ITM PE (Put Option)Ideal Premium
24,85025,000 PE या 24,900 PE₹120–₹160 approx

📌 25,000 PE या 150 point ऊपर वाला ITM
👉 ये बहुत deep ITM नहीं है (safe है)
👉 Premium ज़्यादा है लेकिन stable रहता है
👉 Time decay कम होता है


💰 आपके Target और SL के हिसाब से Calculation:

ParticularValue
Target₹1500
SL₹500
Risk:Reward1:3 ✅ सही है
Lot Size75 (Nifty)
Required MovePremium में ~₹20-25 move चाहिए

अगर आपने ₹120 पर Buy किया — तो ₹140-145 पर निकलना चाहिए (for ₹1500 profit)
SL ₹110 या ₹105 पर रखें (₹500 loss)


⚠️ क्या बड़ा Premium जल्दी SL हिट करता है?

नहीं, उल्टा:

✅ बड़ा premium (ITM) में कम volatility होती है
✅ ये ज़्यादा stable होते हैं
❌ OTM में तेजी से गिरावट आती है, वहाँ SL जल्दी कटता है

📌 इसलिए आपका सोचना उल्टा था — बड़ा premium ज़्यादा stable होता है, और SL जल्दी नहीं कटता अगर Trend सही हो।


🛑 क्या गलती Traders करते हैं?

गलतीसुधार
OTM लेकर बड़ा move सोचते हैंITM लो, छोटा move में बड़ा फायदा लो
बिना trend के buy करते हैंपहले 15-min chart पर trend देखो
छोटा SL बहुत tight रखते हैंSL previous candle पर logical रखो

✅ Final Strategy आपके लिए (₹500 SL, ₹1500 Target):

ParameterValue
Capital₹5000–₹6000
BuyITM PE (150–200 point ऊपर का)
Timeframe15 min chart analysis + 1 min entry
SLPrevious candle high/low (₹8–10)
Target₹20–25 (Risk:Reward = 1:2.5+)
Time9:30 AM – 11:30 AM best

🧠 Bonus Tip:

ITM Option का premium stable होता है, इसलिए अगर आपने सही trend पकड़ा — तो SL कटेगा नहीं, और move बहुत जल्दी target दे देगा।


✅ Ready to Use Example:

Nifty SpotTradeOptionPriceSLTarget
24,850Bearish25,000 PE₹130₹120₹150–155
24,850Bullish24,700 CE₹125₹115₹145–150

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लालच ट्रेडिंग में सबसे खतरनाक दुश्मन है — ये न तो सिस्टम देखता है, न चार्ट, बस पैसा देखता है।

आपके अंदर जो लालच आता है, वह 3 रूपों में आता है:

  1. “थोड़ा और ले लूं…” – जब प्रॉफिट दिख रहा होता है

  2. “अब तो बड़ा पैसा बनेगा” – जब ट्रेड फेवर में जा रहा होता है

  3. “इस बार पूरा निकालना है” – जब पिछली बार जल्दी निकल गए थे

अब आइए इसे कंट्रोल करने के 5 पावरफुल तरीकों को समझते हैं:


🔐 1. लालच से लड़ना नहीं है — उसे सिस्टम में बाँध देना है

लालच तब आता है जब मन कहता है: “अब कितना मिलेगा?”
हमें उसे एक सिस्टम देना है: “मुझे कितना चाहिए?”

🧭 समाधान:

  • हर ट्रेड से पहले फिक्स कर दो:

    • ₹X Risk

    • ₹3X Target

  • अगर 3X मिल गया — बाहर हो जाओ, बिना सोचे।

📌 Target लिमिटेड, लालच अनलिमिटेड।
लक्ष्य क्लियर हो तो लालच नहीं उभरेगा।


🎯 2. Partial Booking = लालच की दवा

जब ट्रेड प्रॉफिट में चल रहा हो, 50% निकाल लो।
बाकी पर Trailing SL लगा दो।

✅ इसका फायदा:

  • लालच शांत होगा

  • मन को लगेगा: “कुछ तो ले लिया”

  • ट्रेड खुला भी रहेगा — ताकि मौका हाथ से न जाए


🧘‍♂️ 3. Profit को “रख” लो, गिनो मत

ज्यादा लोग सोचते हैं: “अभी तो ₹1000 हो गया, 2000 हो जाए फिर निकलूंगा…”
लेकिन बाजार पलटता है — और सारा उड़ जाता है।

🪙 समाधान:

  • प्रॉफिट को बुक करके ट्रेडिंग से बाहर आ जाओ 10 मिनट के लिए

  • खुद को कहो: “अब मैं फ्री हूं। अगला ट्रेड अलग सोच से लूंगा।”


🔄 4. हर प्रॉफिट के बाद “No Trade Rule”

एक प्रॉफिट के बाद लालच और कॉन्फिडेंस साथ में आते हैं — और अगला ट्रेड अक्सर गड़बड़ होता है।

🧩 उपाय:

  • एक प्रॉफिट के बाद 15 मिनट “नो ट्रेड ज़ोन” बनाओ।

  • मन को शांत होने दो, लालच नीचे आएगा।


📓 5. “मैं कितना कमाना चाहता हूं?” — इसे रोज़ सुबह तय करो

अगर आप दिन का टारगेट तय नहीं करते, तो मन कहता है — और चाहिए।

✔️ नियम:

  • “मेरा आज का लक्ष्य ₹500 है”

  • अगर मिल गया, तो शांति से सिस्टम बंद

  • इससे लालच को ब्रेक लगता है

“ट्रेडिंग एक बिजनेस है, जुआ नहीं” ये मंत्र रोज़ दोहराओ

  • लॉस = खर्चा। प्रॉफिट = इनकम।

  • हर बिजनेस में खर्च होता है। यही समझ अंदर बैठाओ।

    A. Market हमेशा सही है, हम गलत हो सकते हैं

    • यह सोच डालिए: “Market मेरी सोच से बड़ा है। मुझे बस रूल फॉलो करना है, रिज़ल्ट market देगा।”

    B. SL को नुकसान नहीं, बीमा समझो (Insurance)

    • जैसे गाड़ी का इंश्योरेंस होता है, वैसे ही SL हमारा फाइनेंशियल इंश्योरेंस है।

    • इसे “खर्च” मानो, “ग़लती” नहीं।

    C. SL Trigger होते ही मार्केट से दूर चले जाओ 10-15 मिनट

    • लॉस के तुरंत बाद फिर से ट्रेड मत लो।

    • ब्रीक लें, पानी पिएं, उठकर चलें — ताकि इमोशन शांत हो।

1. FOMO को कैसे कंट्रोल करें — “डर लगता है कि कहीं मौका छूट न जाए”

👉 समस्या:

आपको लगता है कि “अब नहीं खरीदा तो मौका चला जाएगा,” और आप बिना कंफर्मेशन के ही एंट्री ले लेते हैं।

✅ समाधान:

A. “No Setup, No Trade” रूल लिखकर रखो

  • एक डायरी में अपनी स्ट्रेटजी के क्लियर रूल्स लिखिए।

  • जब तक उन रूल्स का सिग्नल न आए, तब तक “कोई भी ट्रेड नहीं।”

  • इसे रोज़ सुबह 2 मिनट पढ़ें। खुद को याद दिलाएं — “मैं सेटअप पर ट्रेड करता हूं, इमोशन पर नहीं।”

B. “Market में रोज़ मौका होता है” ये बात खुद से रोज़ कहो

  • एक ट्रैडिंग अफर्मेशन बनाओ:

    “मैं एक प्रोफेशनल ट्रेडर हूं। मुझे रोज़ नए मौके मिलते हैं। मुझे भागना नहीं है, इंतज़ार करना है।”

C. चार्ट को दूर से देखने की आदत डालो (15min/1H)

  • छोटा टाइमफ्रेम (1min/3min) ज्यादा FOMO देता है।

  • बड़ा टाइमफ्रेम शांति देता है — और बेहतर सिग्नल देता है।

🔸 आपके अंदर Emotional Bias vs Technical Logic की लड़ाई चल रही है:

समस्याकारणसमाधान
जल्दी EntryFOMO और अंदाज़ाConfirmation का इंतज़ार + प्री-डिफाइन्ड रूल
जल्दी Exitडर कि प्रॉफिट चला जाएगाPartial Booking + Trailing SL
Hold में लॉसगलत जगह एंट्री या ओवरबॉटEntry से पहले RSI/Volume/Zones जरूर चेक करें
लालच“आज बड़ा पैसा बनेगा” वाली सोचCapital का % फिक्स करके Entry करो (Risk Management)

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Share Market Our Company

स्टॉक मार्केट में कुछ भी हो सकता है, और अगर कोई ये कहता है की मेने सब सीख लिया अब में चार्ट देख के या अपनी कोई गडित लगा के में सिर्फ प्रॉफिट ही प्रॉफिट करता हु 99%  Accurecy है, तो वह गलत है मार्केट हमेशा से ही Unpredictable हैकिसी के पास कोई जादू नही है |

  • Over Trading नहीं करना है, पर डे सिर्फ ३ ट्रेड ही लेना है |
  • 1 ट्रैड में फिक्स 5% का ही रिस्क लेना है ज्यादा का नही |
  • सिर्फ 1 स्ट्रेटजी फॉलो करना है 2 या उससे अधिक नही |
  • FOMO में या जल्दबाजी में ट्रैड न ले, सेटअप बने तो ले वर्ना न ले |
  • आप्शन ट्रेडिंग में स्कैल्प में मिनिमम 1 मिनिट और मैक्स 30 मिनिट ही दे |

  • Buy को फिक्स करे, ऊपर नीचे न करे, की इससे नीचे शेयर नही आयेगा, ले लो नही तो opportunitty छुट जायेगा, वो आपका SL हिट करके आपके टारगेट तक जायेगा ये हमेशा याद रखे, तो Entery पॉइंट सही जगह रखे, हडबडा के नही |

  • EXIT पॉइंट पहले से फिक्स रखे, और शेयर आपके SL तक जाये तो ये मत सोंचे की थोडा और SL डाउन कर देता हु, मेरा SL हिट नही होगा | SL तो आपका हिट होगा, भगवान ने लिख दिया है वो, क्योंकि मार्केट ने इतना उतार चड़ाव किया की आपकी साइक्लोजी ने गलत जगह Entery ले लिया, और अब आपका SL हिट कर के मार्केट आपके टारगेट से भी ऊपर जायेगा |

  • कभी कभी आप दिन में 5 ट्रेड लोगे और 5 की 5 गलत निकल जाएँगी, और एसा ज्यादातर जब होगा जब आप स्ट्रेटजी बदल बदल कर ट्रेड कर रहे होगे |

Operators (बड़े खिलाड़ी, प्रोफेशनल ट्रेडर्स, FII, DII, Institutions) कैसे सोचते हैं ट्रेडिंग में — ये समझना ही रिटेल ट्रेडर के लिए गेम चेंजर होता है।


🎯 पहले समझो – Operator होता कौन है?

Operator वो होता है जो:

  • बहुत बड़े पैसे से ट्रेड करता है

  • मार्केट को एक हद तक मूव करा सकता है

  • ट्रेडर्स की मनोवृत्ति (Psychology) को समझता है और उसका इस्तेमाल करता है

  • Retail ट्रेडर्स को ट्रैप करता है – SL हिट करवाता है, Breakout/Breakdown जाल बिछाता है


🧠 Operators कैसे सोचते हैं? (Mindset)

1. Liquidity कहा है – वहीं ऑपरेटर जाएगा

जहां SL और pending order पड़े होते हैं, operator वहीं price ले जाएगा।

उदाहरण:

  • अगर कोई Resistance ब्रेक हो रहा है और बहुत सारे लोग Buy कर रहे हैं
    तो operator थोड़ा ऊपर spike करके वापस गिरा देता है
    जिससे सबके Stop Loss हिट हो जाएं → खुद नीचे से खरीद लेता है


2. Retailers को उलझाना

ऑपरेटर चाहता है कि आम लोग गलत दिशा में जाएं

उदाहरण:

  • News में तेजी दिखाई, लोग खरीदते हैं

  • Operator पहले से बेच चुका होता है — वो news बनवाता है, फैलाता है, फिर गिरा देता है
    👉 इसे कहते हैं “Buy the rumour, sell the news”


3. Volume और Price से गेम खेलना

Operator जानता है कि Retailer volume देखके excite होता है।

  • अचानक volume spike दिखाता है

  • लोग सोचते हैं breakout है — operator वहीं sell डाल देता है


4. Stop Loss हंटिंग

Operator को SL trigger zone पता होता है — वहां तक price ले जाता है

उदाहरण:

  • Support ₹300 है, सबने SL ₹298 पर लगाया है

  • Operator price ₹297.90 तक ले जाकर SL trigger कराता है, फिर ऊपर ले जाता है


5. Fake Breakouts & Fake Breakdowns

  • Resistance ₹1000 है
    Operator ₹1005 तक ले जाकर दिखाता है “Breakout”
    सब buy कर लेते हैं
    फिर वह ₹980 तक गिरा देता है
    👉 यही होता है “Bull trap”


🔧 Operator की Strategy का Simple Version:

StepOperator क्या करता है?मकसद
1Retailer को एक bias देता है (news, chart pattern)लोगों को एक साइड पर लाना
2Price को SL के पास ले जाता हैLiquidity लेने के लिए
3उल्टी दिशा में बड़ा मूव करता हैProfit book करना

📊 कैसे पकड़े ऑपरेटर की चाल?

  1. Volume analysis करो – Volume बढ़ा, Price नहीं बढ़ा? समझ जाओ accumulation हो रहा है

  2. Fake breakouts से सावधान – पहला breakout कभी असली नहीं होता

  3. Stop loss hunting zone पकड़ो – पिछले swing high/low के नीचे SL पड़ता है – operator वहीं price ले जाएगा

  4. News पर मत ट्रेड करो – operator पहले से तैयार रहता है


🎁 BONUS: Operator Mindset से ट्रेड करने की Strategy (Example)

🔥 “Trap and Reverse” Strategy:

  1. मार्केट gap up खुला, लोग buy कर रहे हैं

  2. Operator ऊपर spike करके सबको trap करता है

  3. Volume अचानक कम → Price नीचे गिरने लगता है

  4. Trade setup: Short करो जब पहला बड़ा red candle बने + volume घटे

👉 SL: उस spike का top
👉 Target: gap fill या nearest support

  • 🔍 Operator की सोच (Mindset)

  • 📊 Gap Up / Gap Down Trap कैसे पकड़ें

  • 📈 Fake Breakout / Breakdown पहचानने का तरीका

  • 🧠 Retailers को कैसे trap किया जाता है (Examples)

  • 🛠 Strategy Rules (Entry, Stop Loss, Target)

  • 🔍 Real Chart Example (Nifty + Stock)

  • 🔎 Bonus: Volume से manipulation पकड़ने की Trick

  • 💡 TradingView का Pine Script (Optional)

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A wonderful serenity has taken possession of my entire soul, like these sweet mornings of spring which I enjoy with
my whole heart. I am alone, and feel the charm of existence in this spot.

ऑप्शन ट्रेडिंग में सफल होने के लिए आपको कुछ प्रो लेवल टिप्स का ध्यान रखना जरूरी है:

1. मार्केट ट्रेंड को समझें (Trend Analysis)

  • हमेशा बड़े मार्केट ट्रेंड की दिशा में ट्रेड करें। अगर मार्केट बुलिश (उपर की तरफ) है, तो कॉल ऑप्शन खरीदने पर फोकस करें। अगर मार्केट बियरिश (नीचे की तरफ) है, तो पुट ऑप्शन पर ध्यान दें।
  • ट्रेंड रिवर्सल की पहचान करने के लिए चार्ट पर प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स को ध्यान से देखें।

2. वोलैटिलिटी को समझें (Volatility)

  • Implied Volatility (IV) ऑप्शन की प्राइसिंग में अहम रोल निभाती है। जब IV बहुत ज्यादा होती है, तो ऑप्शन महंगे होते हैं, और जब कम होती है, तो ऑप्शन सस्ते होते हैं। IV बढ़ने पर ऑप्शन प्रीमियम बढ़ सकता है, भले ही स्टॉक ज्यादा मूव न करे।
  • IV के आधार पर सही एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स को पहचानें। IV के ज्यादा होने पर ऑप्शन बेचने पर विचार करें और कम होने पर ऑप्शन खरीदें।

3. रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management)

  • ऑप्शन ट्रेडिंग में हमेशा सीमित जोखिम होता है, लेकिन यह ध्यान रखें कि आप पूरी कैपिटल खो सकते हैं। हर ट्रेड में अपने पूंजी का सिर्फ 2-3% ही जोखिम में डालें।
  • स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करें और मुनाफा मिलने पर जल्दी एग्जिट करने का प्लान रखें। कभी भी एक बड़े ट्रेड की उम्मीद में जोखिम बढ़ाने से बचें।

4. समय का ध्यान रखें (Time Decay – Theta)

  • ऑप्शन की वैल्यू समय के साथ घटती है, खासकर जब आप ऑप्शन खरीदते हैं। इस समय क्षय को समझें और उसी के अनुसार अपनी ट्रेड की समयसीमा चुनें।
  • नजदीकी एक्सपायरी ऑप्शन का समय क्षय तेजी से होता है, इसलिए ध्यान रखें कि आप कब खरीद या बेच रहे हैं।

5. ग्रीक्स का उपयोग (Use of Greeks)

  • ऑप्शन ट्रेडिंग में Delta, Gamma, Theta, Vega जैसी ग्रीक्स को समझना बहुत जरूरी है। ये आपको ऑप्शन के प्राइस मूवमेंट, टाइम डिके, और वोलैटिलिटी के इम्पैक्ट को समझने में मदद करेंगे।
  • खासतौर पर Delta आपको बताएगा कि आपकी पोजीशन स्टॉक की मूवमेंट के प्रति कितनी सेंसिटिव है।

6. स्ट्रैटेजीज़ का प्रयोग (Use of Advanced Strategies)

  • केवल सिंगल कॉल या पुट ऑप्शन पर निर्भर न रहें। स्प्रेड्स, स्ट्रैडल्स, स्ट्रैंगल्स और आयरन कोंडोर जैसी एडवांस्ड स्ट्रैटेजीज़ का उपयोग करें ताकि आप सीमित जोखिम के साथ बेहतर मुनाफा कमा सकें।
  • ये स्ट्रैटेजीज़ आपको दोनों दिशाओं में लाभ उठाने और वोलैटिलिटी से भी लाभ उठाने का मौका देती हैं।

7. समाचार और इवेंट्स पर ध्यान दें (News & Events)

  • इकोनॉमिक डेटा, कमोडिटी प्राइस मूवमेंट्स, और कंपनियों की अर्निंग रिपोर्ट्स ऑप्शन की कीमत पर भारी असर डालते हैं। ट्रेड करने से पहले हमेशा महत्वपूर्ण इवेंट्स को ध्यान में रखें।
  • ऑप्शन ट्रेडिंग से पहले इस बात का ध्यान रखें कि किसी बड़े इवेंट या घोषणा के समय आप किस पोजीशन में हैं, क्योंकि इवेंट्स के दौरान वोलैटिलिटी बढ़ सकती है।

8. मेंटल डिसिप्लिन (Mental Discipline)

  • ऑप्शन ट्रेडिंग में इमोशंस पर कंट्रोल बहुत जरूरी है। कभी भी लालच या डर के आधार पर ट्रेड न करें। लॉस होने पर उसे काटना सीखें और जीतने वाली ट्रेड्स में ज़्यादा समय तक बने रहना सीखें।
  • पहले से ट्रेड प्लान बना लें और उसी के अनुसार डिसिप्लिन के साथ एग्जिक्यूट करें।

इन सभी टिप्स को ध्यान में रखते हुए, आप ऑप्शन ट्रेडिंग में प्रो लेवल पर सफल हो सकते हैं। 

 
You said:

स्प्रेड स्टेटस ट्राएंगल्स और आईरन कंडर क्या है

ChatGPT said:

स्प्रेड्स, स्ट्रैंगल्स, और आयरन कोंडोर ऑप्शन ट्रेडिंग की एडवांस्ड स्ट्रैटेजीज़ हैं, जो रिस्क कम करने और संभावित मुनाफे को बढ़ाने के लिए बनाई गई हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:

1. स्प्रेड्स (Spreads)

स्प्रेड्स में आप एक ही एक्सपायरी के दो अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस पर ऑप्शंस खरीदते और बेचते हैं। इससे रिस्क सीमित हो जाता है और मुनाफे की संभावना बनी रहती है।

दो मुख्य प्रकार के स्प्रेड्स:

  • बुल कॉल स्प्रेड (Bull Call Spread):

    • बुलिश मार्केट में मुनाफा कमाने के लिए इस स्ट्रैटेजी का उपयोग किया जाता है। इसमें एक लो स्ट्राइक प्राइस पर कॉल ऑप्शन खरीदा जाता है और एक हाई स्ट्राइक प्राइस पर कॉल ऑप्शन बेचा जाता है।
    • इस स्ट्रैटेजी में रिस्क कम होता है क्योंकि आपने दोनों ऑप्शन खरीदे और बेचे होते हैं, जिससे लॉस सीमित होता है।
  • बियर पुट स्प्रेड (Bear Put Spread):

    • बियरिश मार्केट के लिए, पुट ऑप्शन खरीदा और बेचा जाता है। कम स्ट्राइक प्राइस का पुट ऑप्शन खरीदा जाता है और हाई स्ट्राइक प्राइस का पुट ऑप्शन बेचा जाता है।
    • इसका रिस्क भी सीमित रहता है क्योंकि आपकी पोजीशन दोनों साइड पर कवर होती है।

2. स्ट्रैंगल्स (Strangles)

स्ट्रैंगल एक ऐसा ऑप्शन स्ट्रैटेजी है जिसमें आप एक ही एक्सपायरी के दो अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस पर एक कॉल और एक पुट ऑप्शन खरीदते हैं।

  • लॉन्ग स्ट्रैंगल (Long Strangle):

    • इसमें एक आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) कॉल ऑप्शन और एक OTM पुट ऑप्शन खरीदा जाता है। यह तब फायदेमंद होता है जब आपको लगता है कि स्टॉक की कीमत में बड़ी मूवमेंट होगी, लेकिन दिशा स्पष्ट नहीं है।
    • अगर प्राइस में बड़ा मूव होता है, तो आप प्रॉफिट कर सकते हैं, भले ही प्राइस ऊपर जाए या नीचे।
  • शॉर्ट स्ट्रैंगल (Short Strangle):

    • इसमें OTM कॉल और OTM पुट ऑप्शन बेचे जाते हैं। यह तब उपयोगी है जब आपको लगता है कि स्टॉक प्राइस में ज्यादा मूवमेंट नहीं होगा।
    • इसमें सीमित मुनाफा होता है, लेकिन अगर प्राइस बहुत ज्यादा मूव करता है तो लॉस हो सकता है।

3. आयरन कोंडोर (Iron Condor)

आयरन कोंडोर एक चार-ऑप्शन स्ट्रैटेजी है जिसमें आप दो कॉल और दो पुट ऑप्शंस का उपयोग करते हैं, जिनकी स्ट्राइक प्राइसेस अलग-अलग होती हैं लेकिन एक्सपायरी डेट समान होती है। यह स्ट्रैटेजी मार्केट के साइडवेज मूवमेंट से मुनाफा कमाने के लिए उपयोग की जाती है।

आयरन कोंडोर की संरचना:

  • एक OTM कॉल ऑप्शन खरीदा जाता है और एक स्ट्राइक प्राइस ऊपर OTM कॉल बेचा जाता है।
  • साथ ही, एक OTM पुट ऑप्शन खरीदा जाता है और एक स्ट्राइक प्राइस नीचे OTM पुट बेचा जाता है।
  • यह स्ट्रैटेजी सीमित मुनाफा और सीमित नुकसान के साथ आती है। इसका फायदा यह है कि मार्केट अगर एक सीमित रेंज में ट्रेड करता है, तो आपको दोनों कॉल और पुट से प्रीमियम का मुनाफा होता है।

आयरन कोंडोर का लाभ:

  • सीमित रिस्क: इसमें आपका रिस्क हर तरफ से सीमित रहता है।
  • साइडवेज मार्केट: अगर आपको लगता है कि मार्केट ज्यादा मूव नहीं करेगा, तो यह स्ट्रैटेजी बहुत उपयोगी है क्योंकि आप प्रीमियम कलेक्ट करते हैं।

इन स्ट्रैटेजीज़ का उपयोग प्रोफेशनल ट्रेडर्स रिस्क मैनेजमेंट और संभावित मुनाफे को बढ़ाने के लिए करते हैं। अगर आप इनका सही से उपयोग करते हैं, तो आप ऑप्शन ट्रेडिंग में एक स्थिर मुनाफा कमा सकते हैं।

 
You said:
मैं ऑप्शन ट्रेड में सिर्फ Buy करता हूं तो buy के लिए क्या स्ट्रेटजी है सबसे बढ़िया और मुझे कौन से प्रीमियम खरीदने चाहिए मेरे पास 10000 का कैपिटल है मुझे ज्यादातर ट्रेड आउट ऑफ मनी में करना चाहिए या इन द मनी में करना चाहिए और कितने प्राइस तक का करना चाहिए
ChatGPT 

यदि आप ऑप्शन ट्रेड में केवल Buy करते हैं और आपके पास 10,000 INR का कैपिटल है, तो आपको रिस्क मैनेजमेंट और सही स्ट्रेटजी पर ध्यान देना चाहिए। यहां कुछ सुझाव और स्ट्रेटजी हैं जो आपको सही प्रीमियम चुनने में मदद कर सकते हैं:

1. आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) और इन-द-मनी (ITM) ऑप्शंस

  • OTM ऑप्शंस: यह ऑप्शंस सस्ते होते हैं और इनमें मल्टीबैगर रिटर्न का मौका होता है, लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा होता है क्योंकि ये ज्यादा मूवमेंट के बिना बेकार हो सकते हैं। अगर आप छोटे कैपिटल से बड़ी मूवमेंट पर दांव लगाना चाहते हैं तो OTM ऑप्शंस खरीद सकते हैं।
  • ITM ऑप्शंस: यह ऑप्शंस महंगे होते हैं, लेकिन इनका प्रॉफिट ज्यादा सुरक्षित रहता है क्योंकि इनमें इन्ट्रिंसिक वैल्यू होती है। यह उन ट्रेडर्स के लिए बेहतर है जो कम रिस्क लेकर प्रॉफिट कमाना चाहते हैं।

2. स्ट्रेटजी

  • स्विंग ट्रेडिंग: अगर आप खरीदारी के लिए OTM ऑप्शंस चुनते हैं, तो आपको मार्केट में बड़े स्विंग्स का फायदा उठाने पर ध्यान देना चाहिए। स्विंग ट्रेडिंग का फायदा तब होता है जब आपको लगता है कि एक शॉर्ट-टर्म में मार्केट एक दिशा में मूव करेगा।
  • इन्ट्रा-डे स्ट्रेटजी: अगर आप इन्ट्रा-डे ट्रेड करते हैं तो ITM ऑप्शंस को चुनें क्योंकि इनकी मूवमेंट कीमत के साथ तेजी से होती है। आप तेजी से प्रॉफिट बुक कर सकते हैं और कम रिस्क रहता है।
  • वोलैटिलिटी आधारित ट्रेडिंग: अगर आप ऐसी स्थिति में हैं जहां मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ने की उम्मीद है, तो OTM ऑप्शंस चुनें। जैसे, अगर आप समझते हैं कि बैंक निफ्टी में बड़ी मूवमेंट आएगी, तो OTM ऑप्शन बाय करके इसका फायदा उठा सकते हैं।

3. कौन से प्रीमियम खरीदने चाहिए

  • बजट और कैपिटल: चूंकि आपका कैपिटल 10,000 INR है, इसलिए आप OTM ऑप्शंस चुन सकते हैं क्योंकि इनका प्रीमियम कम होता है। लेकिन आपको ऐसे स्ट्राइक प्राइस का ऑप्शन चुनना चाहिए जो ज्यादा दूर न हो। उदाहरण के लिए, ATM (एट-द-मनी) या थोड़ा OTM ऑप्शन खरीदें ताकि अगर मार्केट आपके पक्ष में जाए, तो जल्दी से मुनाफा मिल सके।
  • अवॉयड डीप OTM ऑप्शंस: अगर आप बहुत दूर के OTM ऑप्शंस खरीदते हैं, तो वे बहुत ही कम प्रीमियम पर मिलते हैं लेकिन उनकी जीतने की संभावना भी कम होती है। इसलिए ऐसी स्ट्राइक चुनें जो 2-3% दूर हो, ताकि मूवमेंट होने पर आपको मुनाफा मिले।
  • सही एक्सपायरी चुनें: छोटी अवधि (1-2 हफ्ते) की एक्सपायरी के ऑप्शंस में प्रीमियम कम होते हैं, लेकिन उनका टाइम डिके तेज़ होता है। अगर आप थोड़ा लंबी अवधि के ऑप्शंस (1 महीने) खरीदते हैं, तो टाइम डिके का असर कम होगा और प्रॉफिट की संभावना बढ़ेगी।

4. रिस्क मैनेजमेंट

  • स्टॉप लॉस का उपयोग करें: चूंकि आप केवल ऑप्शंस खरीद रहे हैं, तो स्टॉप लॉस का इस्तेमाल जरूरी है। मान लें कि अगर आपके ऑप्शन का प्रीमियम 30-40% गिरता है, तो उसे तुरंत काट दें।
  • एक बार में पूरा कैपिटल न लगाएं: अपने 10,000 INR के कैपिटल को छोटे हिस्सों में बांटें। हर ट्रेड में केवल 2,000-3,000 INR लगाएं ताकि अगर एक ट्रेड में लॉस हो, तो दूसरे ट्रेड में मुनाफा कमाया जा सके।

5. प्राइस रेंज

  • आपके 10,000 INR के कैपिटल को ध्यान में रखते हुए, आपको ऐसे ऑप्शंस चुनने चाहिए जिनका प्रीमियम 100-200 INR हो। इससे आप अपने कैपिटल को संभालकर ट्रेड कर पाएंगे और रिस्क भी सीमित रहेगा।
  • अगर आप ITM ऑप्शंस खरीदते हैं तो थोड़े महंगे ऑप्शंस पर फोकस करें जिनका प्रीमियम 200-400 INR हो सकता है, ताकि टाइम डिके से नुकसान न हो।

अंतिम सुझाव:

  • ITM ऑप्शंस: अगर आप सुरक्षित खेलना चाहते हैं और तेजी से मुनाफा कमाना चाहते हैं।
  • OTM ऑप्शंस: अगर आप बड़े मूवमेंट पर दांव लगाकर छोटा कैपिटल से ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे हैं।
  • स्टडी करें: ऑप्शन ग्रीक्स (Delta, Theta, Vega) को समझें ताकि आपको अपने ट्रेड की सटीक जानकारी हो।

इस स्ट्रेटजी से आप अपने 10,000 INR के कैपिटल के साथ बेहतर ऑप्शन ट्रेडिंग कर सकते हैं।

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